सुनो तो ये संगीत है मेरा

सुनो तो ये संगीत है मेरा , नही कोई एक मीत है मेरा। हुआ मिलन हम दोनों का ,था, समय अगस्त महीने का। मैंने है मीत नया पाया , सबने परिचय कुछ करवाया। है संसय कुछ ,कुछ हैविश्वास, है सबको कुछ हमसे भी आस। सुनो सार संगीत की ,...

क्या हम आज़ाद हैं?

भाई यह कैसी आज़ादी हुई? दिन - ब - दिन हम सब की बर्बादी हुई! दिया हमें महँगाई है, कठिन कर दी पढ़ाई है, जन - मानस सोच कर घबराता है, कैसे कष्टों से हमारा नाता है, वह कष्ट हमारे जान न पाता है, फिर भी न जाने क्यों वोट माँगने आता है|..

Decision Making and Gut Feelings

“Whenever such a situation, That proceeds to formation. You have to make decision, Opt alternatives and follow the precision. When all your facts are unappealing, Friend just follow your Gut Feeling. Don’t let anyone else to ask, Coz it’s a too easy task.”

Interesting Facts About Girls:A Guide for Guys

The opposite sex can be very confusing when you’re opt particular way of thinking. However, girls don’t wish stay confusing. Dear you can use some interesting facts about girls to expand your knowledge against Girls. You’ll find important that knowledge really is power when it comes to dealing with Opposite sex.

Free top 10 Educational websites for kids

Our kids could easily become addicted to technology, especially as they are growing older and find more to do online. But, We still keep their screen time limited and focused to learning. Here are some top educational websites for kids.

Sunday, June 24, 2018

व्यंग्य-अच्छे दिन का नया स्वरुप|


इस पोस्ट में व्यक्तिगत अनुभव को व्यक्त किया गया है इसका किसी पार्टी या समुदाय से कोई लेना देना नहीं है अगर ऐसा पाया  जाता है तो इसे मात्रा एक संयोग कहा जायेगा, इस लेख का उद्देश्य किसी के विचारो को ठेस पहुंचाने या भावनाओ को आहत करने का नहीं है ....|


धरना करना मतलब काम करना : 21 वीं सदी के प्रथम दसक तक ऐसा था की अगर सरकारे काम करती थी तो धरना बंद / अगर धरना करती थी तो काम बंद ...आज दिल्ली की राजनैतिक परिवेश में इसका उलट ही नज़ारा है : सरकार LG ऑफिस में धरना दे रही और विपक्षी दल CM ऑफिस में धरना दे रहे दोनों ये कह रहे की हम अपना काम कर रहे . ये कहा तक सही है ये भविष्य के गर्त में छिपा है |


महंगी शिक्षा महना तेल देख रहे नेता का खेल : बड़े बड़े होर्डिंग एंड बैनरो की मने तो देश आर्थिक स्थिति और डेवलपमेंट में बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है परन्तु मेरे लिए ये सब बातें 4 साल सरकार के कर्यकाल के बाद जुमला ही लगती है ,, महंगाई चरम सीमा पे है चाहे आप डीजल पेट्रोल या सरसो के तेल का उदरण ले लो , या किसी भी वस्तु का उदहारण ले जो सामान्य जन जीवन के लिए बेसिक जरूरत है उनके दामों को देख लीजिये . सब दिन ब दिन महंगा ही हुआ है ,, किसी भी  क्षेत्र में, शिक्षा के लिए खर्च चाहे डायरेक्ट या इंडायरेक्ट ज्यादा ही हुआ है .

पीने योग्य पानी की समस्या : तक़रीबन आज़ादी के लगभग 70 साल के बाद भी आज ग्रामीण इलाको के 7% से ज्यादा लोग पीने योग्य पीने का पानी नहीं पा रहे ...किसी के मुँह से मैंने सुना था की अगला विश्व युद्ध पिने के पानी को लेकर होने वाला है , स्थिति कुछ हद तक सही ही नज़र आ रही है ,, पानी की 1 लीटर की बोतले 20 Rs हो चुकी है ,, जिनको खाने के लिए ठीक से भोजन नहीं मिल रहा उन्हें शुद्ध पिने के पानी की कल्पना केवल कल्पना मात्र है .

केंद्र शासित राज्य की विडंबना:जनता द्वारा चुनी सरकार को संवैधानिक और राजनैतिक बहिष्कार या चुनी सरकार को प्रभावित कर देना जिससे कि राज्य सरकार कोई डिसीजन या बिल जो असेंबली में सर्वसम्मति से पास हुआ हो राज्य में लागू ना करवा पाये |

आम जनता और उसका राजनीतिक भविष्य: भारत में आज़ादी के दौर से बहुत सी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हैं चाहे वो राष्ट्रीय स्तर की हो, चाहे राज्य स्तर की हो, चाहे क्षेत्र स्तर की हो, यह सब या तो जाति या तो संप्रदाय या वंशवाद या क्षेत्र के आधार पर हैं इन सब में मुख्यतः कांग्रेस या BJP ऐसी पार्टी है जो राष्ट्र की राजनीति में अब तक स्थापित पार्टी और AAP एक ऐसी पार्टी हैं जो अन्ना के लोकपाल के लिए हुए जन आंदोलन की उपज है|

बात कांग्रेस की: कांग्रेस पार्टी में भी आम जनता के लिए राजनीति शुरू करना या इसके बारे में सोचना कल्पना मात्र है |क्योंकि कांग्रेस भी अपने पहले से जाने माने एवं स्थापित चेहरों को या सदस्यों को महत्ता देना चाहती है ऐसे में आम जनता के लिए कांग्रेस में रास्ता आसान नहीं है|


बात BJP की: इसी तरह BJP जो कि संघ के विचारों और राम मंदिर मुद्दों से प्रभावित या यूं कह लें की इसी के दम पर बनी है BJP भी, राजनीति में संघ के लोगों को तवज्जो देने की फिराक में ऐसे में आम आदमी के लिए इस पार्टी में रास्ते बंद है |

अब बात करते हैं आम आदमी पार्टी AAP की: आप एक ऐसी पार्टी जो अन्ना के लोकपाल के लिए जन आंदोलन की उपज है उस जन आंदोलन के समय आम आदमी या यूं कह लें जनमानस को एक आस और उम्मीद जगी की एक नया विकल्प राजनीति में सक्रिय होने वाली है और अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।

AAP का उदय हुआ और मध्यम वर्ग के लोगों ने डोनेशन दिया चाहे देश में रहने वाले या विदेश में रहने वाले हो उस दौर में राजनैतिक बदलाव को देख सभी लोगों ने आशा और उम्मीद के साथ AAP को सपोर्ट किया| पिछले कुछ सालों से AAP की मीडिया ने चाहे जितनी भी खिंचाई की हो या थू-थू की हो, इसके बजाय जनमानस का यूं कह लें निचले तबके के लोगों का AAP को भरपूर समर्थन मिला है और AAP ने अपने वादों के मुताबिक कुछ बेहतर काम भी किए हैं चाहे वह स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो चाहे बेसिक शिक्षा/पढ़ाई में बदलाव हो,,,AAP  का शासनकाल कठिनाइयों भरा भी रहा है जैसे कि दिल्ली एक केंद्र शासित राज्य हैं राज्य सरकार कुछ भी बिना LG की अनुमति के बिना नहीं कर सकती,, और हम सब बखूबी परिचित हैं की AAP और LG का संबंध शुरुआत से  ही चूहे- बिल्ली का या यूं कह लें सांप - नेवले का संबंध रहा है |

पंजाब असेंबली इलेक्शन से पूर्व AAP को भारी समर्थन मिलता दिख रहा था किंतु चुनाव के परिणाम उम्मीद भरे नहीं रहे वजह यह रही कि AAP संगठन का निचले तबके के या कार्यकर्ताओं के बीच संबंध ऐसा नहीं रहा जैसा होना चाहिए | AAP निचले तबके के लोगों का दिल जीतने में असफल रही /

राज्यसभा की सीटों के लिए उम्मीदवार के चयन ने जनमानस की उम्मीदों को तोड़ के रख दिया जिस तरह से बाहर से आए लोगों को राज्यसभा भेजा गया यह गलत था इसके बजाय AAP संगठन को आपके ही लोगों को या जो अन्नाआंदोलन में सक्रिय थे और पार्टी कार्यकर्ता हैं उन्हें भेजना चाहिए था जनमानस की उम्मीद चकनाचूर हो गई अगर AAP को 2019 इलेक्शन में एक अच्छे विकल्प के रुप में स्थापित करना है तो पार्टी के अंदर स्ट्रक्चरल बदलाव और जनमानस से जनमत संग्रह की तरह बातचीत करने को तवज्जो देना चाहिए आम आदमी पार्टी मैं आम आदमी की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे 2019 के चुनाव में अमूल चूक सफलता मिल सके |

राजनैतिकपार्टियां और उनको मिलने वाले चंदे: इस मुद्दे के बारे में ज्यादा चर्चा तब हुई जब आम आदमी पार्टी ‘AAP‘ का गठन हुआ | खूब सारा चंदा ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से इकट्ठा हुआ और एक राजनैतिक बदलाव जनमानस के चंदे से स्थापित हुआ था वैसे हर पार्टी चाहे बीजेपी या कांग्रेस या सपा या बसपा या अन्य पार्टियां अपने पार्टी को चलाने के लिए डायरेक्ट/ इनडायरेक्ट अलग अलग क्षेत्रों से जैसे कि कारपोरेट चैरिटी Firm इत्यादि से चंदा इकट्ठा करते हैं किसी पार्टी को चंदा ज्यादा और किसी को कम मिलता है|
एक प्रश्न मेरे ज़हन में यह आ रहा है कि जब कोई पार्टी सत्ता में नहीं होती है तो उसको चंदे कम और जब सत्ता में होती है तो चंद्र 250 गुना कैसे हो जाता है यह एक खुला प्रश्न है मैं इसके उत्तर की फिराक में हूं अगर आपके पास इसका जवाब हो तो जरुर बताएं शेयर करें या कमेंट बॉक्स में कमेंट करें??

दिनांक 8 नवंबर 2016 अमेरिकन राष्ट्रपति का चुनाव और भारत में नोटबंदी की उद्घोषणा: आज मैं आपको एक बहुत ही मार के की बात बताना चाहता हूं की 8 नवंबर 2016 विश्व इतिहास में एक ऐसा दिन है जिस दिन अमेरिका में राष्ट्रपति को काले से गोरा करने का ड्रामा चल रहा था तो भारत में पैसा ब्लैक से वाइट करने का ड्रामा शुरू हुआ जी हां इंडिया में नोटबंदी की उद्घोषणा हमारे मोदी जी ने कर दिया और 8 दिसंबर 2016 तक केवल 30 दिन के अंतराल में सब लोगों की मृत्यु हुई वजह थी नोटबंदी |
"Source Forbse : India's Demonetisation Kills 100 People Apparently - This Is Not An Important Number" Link: उसी दौरान कुछ ऐसी चीजें हुई जो एक व्यंग मात्र हैं जैसे कि: मोदी जी ने बताया था की अच्छे दिन आएंगे, और यह भी कहा था की सभी के खाते में 1500000 रुपए आएंगे परंतु यह कभी नहीं बताया की लोग अपने पैसे बैंक मैं जमा करने के लिए लाइन में लगेंगे डंडे की मार धक्का-मुक्की सहेंगे………. आपको बताया था क्या? नहीं ना किसी को नहीं बताया था भाई |


मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं 1 महीने के अंतराल में तकरीबन 100 लोग मरे परंतु प्राइम टाइम डिबेट में बीजेपी कार्यकर्ता या प्रवक्ता यह कहते फिर रहे थे कि नोटबंदी के दौरान होने वाली मृत्यु संख्या इंडिया में 1 महीने के अंदर होने वाली मृत्यु संख्या के सापेक्ष 0.01 प्रतिशत ही है,, मुझे ऐसे लोगों पर शर्म आती है क्यों यह तर्क कैसे दे सकते हैं|

और तो और किसी ने बोला कुछ अंडे फूटेंगे तभी आमलेट बनेगा, चलो मैं मान लिया कुछ देर के लिए बिना अंडा  फुटे आमलेट नहीं बनता ,,, मगर मैं यह भी पूछना चाहता हूं आमलेट है,, किधर अच्छे दिन है किधर,, यह सच्चा वादा था या एक जुमला था.

कुछ प्रवक्ता यह भी कहते फिर रहे थे कि यह हमारे देश के पुनर्गठन (restructuring ) के लिए जरूरी है मैं पूछता हूं सबसे की स्टालिन और माओ ने भी अपने देश में पुनर्गठन किया था बिना किसी ट्रेजेडी या मृत्यु के, और बिना अंडा फोड़े ही आमलेट खिलाया था अपने देशवासियों को……यह पुनर्गठन की बातें BJP वालों का राजनैतिक तेवर था (political posturing) बजाय किसी मजबूत आर्थिक बिंदु के वह अपनी बातें अनर्गल बातें प्रसारित कर रहे थे|

यह आपको निर्दई स्टेटमेंट लग सकता है बट मैं तो कहता हूं कि यह संभावित खूनी फैसला था नोटबंदी ||

राज्यसभा में विपक्ष यह भी कहता रहा कि यह शर्म की बात है कि गवर्नमेंट ने सरकार ने नोटबंदी से मरने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से भी मना कर रही है " We have been saying for a long time that over 100 people have died because of demonetisation," said Ghulam Nabi Azad in Rajya Sabha. "But the government refused to pay tribute to the deceased," Ghulam Nabi Azad added.

मुझे ऐसा लगता है नोटबंदी से पहले सरकार को जनमत संग्रह (Referndum) जरूर करा लेना चाहिए था बजाए नोटबंदी के निर्णय से पहले ||

वैसे ही मेरे पास शब्दों का अंबार है आप लोगों के साथ शेयर करने के लिए लेकिन मैं इस पोस्ट को उबाऊ या बड़ा कतई नहीं बनाना चाहता…….. उम्मीद करता हूं कि मेरा यह पर्सनल “उद्धरण :अच्छे दिन का नया स्वरूप”,, आशा करता हूं आप सभी को सच लगा होगा... अगर आप इस उद्धरण से सहमत हैं तो इसे और भी लोगों के साथ शेयर करें जिससे कि वह भी इस बात को जान सकें ||

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Thanks for visiting my blog ......Happy reading :)
  


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Thursday, April 19, 2018

ऑनलाइन चैट करते समय क्या आप वाकई अध्ययन या एग्जाम से पहले तैयारी कर सकते हैं?

क्या आप वास्तव में सोशल मीडिया पर कई साथ-साथ बातचीत करने के दौरान परीक्षाओं में तैयारी कर सकते हैं?

किशोरों ने वास्तव में मल्टी-टास्किंग के इस तरह के कौशल विकसित किए हैं कि वे स्नैपचैट, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम, उत्तर ग्रंथों का जवाब दे सकते हैं और यूट्यूब पर पालतू जानवरों के मजाकिया वीडियो देख सकते हैं, साथ ही अध्ययन के दौरान?

स्कूलों और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं के तैयारी के लिए यह पीक सीजन है, और माता-पिता अपनी सलाह देने, विश्वास करने की कोशिश करेंगे

स्कूल में व्यवहार पर एक शिक्षक, माता-पिता और यूके सरकार के सलाहकार टॉम बेनेट कहते हैं कि यह एक पूर्ण "मिथक" है कि किशोर सोशल मीडिया और ऑनलाइन मनोरंजन के बीच बहु-कार्य कर सकते हैं और अभी भी अध्ययन कर रहे हैं।

श्री बेनेट रिसर्चएड समूह के निदेशक और संस्थापक हैं, जो शिक्षण पेशे के बीच शिक्षा अनुसंधान फैलते हैं, और उनका कहना है कि सभी सबूत सीखने को नुकसान पहुंचाने वाले ऑनलाइन विकृतियों को इंगित करते हैं।

उन्होंने कहा कि तैयारी में फोकस और एकाग्रता की आवश्यकता है, लेकिन यह स्कूप होने जा रहा है

फ़ोन प्रतिबंध
मिस्टर बेनेट कहते हैं, स्कूलवर्क एक दुर्घटनाग्रस्त है, जिसमें एक ऑनलाइन संस्कृति से बाधित नींद और चिंता है, जो कभी भी बंद नहीं होती है।

उनका कहना है, "ज्यादातर प्रभावित बच्चों को पहले से ही सबसे दूर होने की संभावना है।"

अपनी चिंताओं को वापस करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय शोध है

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शिक्षाविद सहित एक अनुसंधान दल द्वारा बोस्टन क्षेत्र में विद्यार्थियों का एक अध्ययन, "किशोरों में अधिक से अधिक मीडिया बहु-कार्य और बदतर शैक्षणिक परिणामों के बीच एक कड़ी" पाया गया।

अमेरिकी शिक्षाविदों ने इसी तरह के परिणाम भी प्राप्त किए, जब उन्होंने इंग्लैंड के स्कूलों में उपलब्धि पर ध्यान दिया, जिन्होंने मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगा दिया था और इतना ही कम से कम संदेश और सोशल मीडिया से दिन का हिस्सा बनाया।























लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से लुइसिया फिलिप बेलैंड, और ऑस्टिन टेक्सास विश्वविद्यालय से रिचर्ड मर्फी ने निष्कर्ष निकाला कि "प्रतिबंध की वजह से छात्र की उपलब्धि में सुधार ही नहीं है, बल्कि यह भी कि कम उपलब्धि और कम आय वाले विद्यार्थियों को सबसे अधिक लाभ मिलता है" ।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक पहले के अध्ययन में संकेत मिलता है कि कई ऑनलाइन विकर्षण वाले लोगों पर बौछार करने से उन्हें तेज प्रतिक्रिया नहीं मिली, इससे उन्हें मेमोरी टेस्ट में कम उत्पादक और कम प्रदर्शन किया गया।

'बस उन्हें बंद करने के लिए नहीं बताओ'
लेकिन क्या यह एक तकनीक-व्यसन किशोरी पर कोई प्रभाव डालने जा रहा है जिसे अपने मोबाइल से शल्य चिकित्सा से अलग करने की आवश्यकता होगी?

समस्या का एक हिस्सा यह है कि जब कोई छात्र ऑनलाइन तैयारी कर रहा है, तो काम और खेल एक-दूसरे से दूर एक क्लिक है।

सोशल मीडिया एक ही स्क्रीन पर तैयारी के रूप में इंतजार कर रहा है। खेल का मैदान और पुस्तकालय एक ही स्थान पर हैं।

यूट्यूब काम करने के लिए एक साउंडट्रैक हो सकता है, लेकिन यह ग्रह पर सबसे बड़ी अनौपचारिक तैयारी सेवाओं में से एक होना चाहिए।

Google मुफ्त शैक्षिक सामग्री और ऑनलाइन ट्यूटोरियल से भरे वेबसाइटों के लिए एक प्रारंभिक बिंदु हो सकता है।

यूसीएल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में शिक्षा में वरिष्ठ व्याख्याता डॉ। सैंड्रा लीटन ग्रे कहते हैं कि माता-पिता के लिए बाध्य होना और बस "इसे बंद करना" कहना एक गलती है।

"चतुर तरीके से यह कहना है, 'कैसे चीजें ऑनलाइन चल रही हैं?' उनसे पूछें कि क्या वे विचलित हो रहे हैं, "वह कहती हैं कि किशोरों को ऑनलाइन समय बर्बाद करने के खतरों से सामना करने के बजाय cajoled की जरूरत है।

'बुराई और अद्भुत'
वे सामाजिक सुधार के साथ परीक्षा तैयारी के बारे में बातचीत कर रहे हो सकते हैं, वह कहते हैं, इसलिए यह हमेशा अगले सोशल मीडिया संदेश के अध्ययन और जवाब के बीच एक स्पष्ट जुदाई नहीं है।

लेकिन वह परीक्षा के दौरान छूट देने की बजाए तनाव को जोड़ने के रूप में सोशल मीडिया के निरंतर आहार को भी देखती है।

वह इसे "फास्ट फूड मानसिकता" के साथ तुलना करती है, तत्काल इनाम के साथ और फिर "असंतोष" की लंबी अवधि की भावना और अन्य किशोरों के "आदिवासी" के साथ फिट होने का दबाव।

डॉ लेटन ग्रे कहते हैं, यह ऑनलाइन संस्कृति किशोरों के लिए "एक ही समय में बुराई और अद्भुत" दोनों है।

लेकिन मीडिया की आदतें बदल गई हैं। इस साल एक वार्षिक रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि बच्चों के मीडिया का समय अब ​​अकेले और कंप्यूटर डिवाइस के माध्यम से कितना खर्च किया गया था।

टॉम बेनेट का कहना है कि माता-पिता अभी भी ऐसे बदलावों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन उनका कहना है कि ऑनलाइन बिताए बहुत अधिक समय की समस्याओं के बारे में बढ़ती हुई जागरूकता है - जो परीक्षाओं में आने वाले उच्च दबाव सप्ताह के दौरान तेज ध्यान में लाया जाता है।

"शायद हम एक मोड़ पर पहुंच रहे हैं," वह कहते हैं।


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Monday, April 2, 2018

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Destination, Target or Points to: This is different for each person and is specific to your blog and your Google Account.
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13. Repeat steps 1 through 6. Your blogspot.com address will redirect to your custom domain. It may take to 24 hours.


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To change your domain (example: mydomain.com) to www.mydomain.com, set up a naked redirect.​
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216.239.34.21
216.239.36.21
216.239.38.21
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Wednesday, February 14, 2018

ये खित्तै -ए -आज़मगढ़ है मगर फैज़ान ऐ तजल्ली है अक्सर ,जो ज़र्रा यहाँ से उठता है, वह नैयर-ए-आज़म होता है....- इकबाल सुहैल








"ये  खित्तै -ए -आज़मगढ़ है मगर फैज़ान ऐ तजल्ली है अक्सर ,जो ज़र्रा यहाँ से उठता है, वह नैयर-ए-आज़म होता है...."- इकबाल सुहैल

ऐतिहासिक एवं पौराणिक दृष्टि से आजमगढ़ की काफी महत्ता है। जब समूचा भारत अंग्रेजी हुकुमत में जकड़ा सिसकियां ले रहा था तो मां भारती के अमर नौनिहालों ने तीन जून 1857 को आजादी का झंडा लहराकर शहर के शासन सत्ता की बागडोर अपने हाथ में थाम ली थी। इसी जिलेमें दुर्वासा, दत्तात्रेय व चन्द्रमा ऋषि की तपोस्थलियां, मां पाल्हमेश्वरी धाम एवं महाराज जन्मेजय की सर्पयज्ञ स्थली अवन्तिकापुरी भी स्थित है। आजमगढ़ की साहित्यिक विरासत ने अगर देश व समाज को रोशन किया है तो समूचे विश्व को चलने का रास्ता दिखलाया है। ऐतिहासिक आइने में आजमगढ़ का अक्श देखने के लिये 15वीं सदी में चन्द्रसेन सिंह नाम के एक राजपूत थे। उनके दो पुत्र सागर सिंह एवं अभिमन्यु सिंह हुए। अभिमन्यु सिंह मुगल सेना में सिपाही हो गये। उनके प्रतिभा एवं योग्यता की चर्चा सम्राट जहांगीर के दरबार दिल्ली तक पहुंची उन्हीं दिनों जौनपुर के पूर्वी क्षेत्रों में कई विद्रोह हुये। उन विद्रोहों पर काबू पाने के लिये सम्राट ने अभिमन्यु सिंह को लगाया। इसी बीच अभिमन्यु सिंह सम्राट के प्रेम से प्रभावित होकर इस्लाम धर्म ग्रहण कर दौलत खां हो गये। सम्राट ने जौनपुर के पूर्वी भाग के 22 परगने पुरस्कार के रूप में देते हुये उन्हें जागीरदार बनाया और 1500 घुड़सवारों का सालार बनाकर मेंहनगर राज्य में भेजा। दौलत खां शाहजहां के शासनकाल में एक सम्मानित सिपहसालार थे, पर उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई, इसका इतिहास में कुछ पता नहीं है। वह निःसंतान रहे, जिसके कारण उन्होंने अपने भतीजे हरिबंश सिंह गौतम (सागर सिंह के बड़े पुत्र) को गोद ले लिया था। जो कि अपने चाचा दौलत खां (अभिमन्यु ंिसंह ) से प्रभावित होकर तथा जागीर एवं पद के लालच में मुसलमान हो गये। परिणामस्वरूप सन् 1629 में हरिबंश सिंह को दौलत खां की जागीर तो मिली ही राजाकी पदवी भी मिल गयी। उन्होंने मेंहनगर को अपने राज्य की राजधानी बनायी। इनके दो बेटे गंभीर सिंह व धरनीधर सिं रहे। हरिबंश सिंह ने तो इस्लाम स्वीकार कर लिया परन्तु उनकी धर्मभीरू रानी रत्नज्योति कुंवर उनसे अलग होकर रहने लगी। रानी रत्नज्योति कुंवर ने सनातन धर्म को नहीं छोड़ा।


स्वाभिमानी एवं वीरांगना होने के नाते पति से अलग रहते हुये हरिबंशपुर कोट से मंेहनगर जाने वाले रास्ते में आठ किमी दूर सेठवल ग्राम रानी रत्नज्योति कुंवर को सुन्दर व प्रिय लगा। रानी ने यहीं पर 52 एकड़ भूमि राजा से मांग लिया और यहां सन् 1629 में पोखरा, हनुमान मंदिर, कुआ एवं सराय तथा सराय के पीछे एक कुआ पानी पीने के लिये बनवाया। उपरोक्त सराय पर आजादी के बाद सन् 1952 में नजूल भूमि यानी रानी का कोई वारिस न होने के कारण शासन द्वारा यह भूमि जिला पंचायत आजमगढ़ को स्थानान्तरित कर दी गयी।

गंभीर सिंह, राजा हरिबंश सिंह एवं रानी रत्नज्योति कुंवर के बड़े पुत्र थे। हरिबंश सिंह की मृत्यु के बाद वहीं मेंहनगर के राजा बने। गंभीर सिंह के तीन पुत्र विक्रमाजीत ंिसह, रूद्र ंिसंह व नारायण सिंह थे। विक्रमाजीत सिंह अपने पिता गंभीर सिंह की मृत्यु के बाद राजा बने राजपाट के चक्कर में उन्होंने अपने छोटे भाई की हत्या करवा दी। रूद्र सिंह की विधवा रानी भवानी कुंवर ने न्याय पाने के लिये औरंगजेब के दिल्ली राजदरबार में फरियाद की। रानी भवानी कुंवर के फरियाद पर विक्रमाजीत को दिल्ली बुलाकर कारागार में डाल दिया गया। इस्लाम धर्म ग्रहण करने की शर्त पर उन्हें मुक्त किया गया। मुसलमान बन जाने के कारण उनकी हिन्दू पत्नी ने उनसे नाता तोड़ दिया। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म ग्रहण कर चुके चन्देल राजा की पुत्री से विवाह किया। इस मुस्लिम रानी से दो पुत्र आजम खां व अजमत खां हुये। बाद में विक्रमाजीत एवं सम्राट औरंगजेब में ठन गयी। औरंगजेब ने सेना भेजकर सम्राट विक्रमाजीत को मरवा डाला। सन् 1650 में  विक्रमाजीत के छोटे भाई रूद्र सिंह की विधवा रानी भवानी कुंवर की भी मृत्यु हो गयी। सन् 1665 से पहले आजमगढ़ मेंहनगर राज्य में पड़ता था।

सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में मेंहनगर राज्य दो भागों में बंटा। पश्चिमी भाग आजम खां को मिला। उन्होंने सन् 1665 में आजमगढ़ शहर बसाकर इसे अपनी राजधानी बनाये। आजम खां की युद्ध कला से प्रभावित होकर औरंगजेब ने जयपुर के राजा जय सिंह के साथ दक्षिण में शिवाजी से संधि करने के लिये भेजा। शिवाजी का दिल्ली में अपमान होने पर राजा आजम खां सम्राट के विद्रोही हो गये। अन्ततः सम्राट औरंगजेब ने उन्हें मरवा दिया। अजमत खां ने भी औरंगजेब के विरूद्ध बगावत का झंडा बुलन्द किया। सम्राट औरंगजेब ने अजमत खां को सबक सिखाने की नियत से इलाहाबाद के सूबेदार हिम्मत खां के नेतृत्व में एक विशाल सेना भेजी। आजमगढ़ के बडे पुल के पास दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में अजमत खां पराजित हुए। अजमत खां के चार पुत्र एकराम खां, मुहब्बत खंां, नौबत खांा व सरदार हुये। दोहरीघाट के पास घाटरा नदी में छलांग लगायी। चारो पुत्र तो नदी के उस पार पहंुच गये परन्तु अजमत खां की नदी में डूबने  से मृत्यु हो गयी। अजमत खां की मृत्यु के बाद उनके बडे़ पुत्र एकराम खां राजा बने। उन्होंने अपनी सेना को मजबूत किया तथा खुद को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया। ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासनकाल में वाराणसी व गाजीपुर जिले के कुछ हिस्से काटकर 18 सितम्बर 1832 को आजमगढ़ को जिले का दर्जा प्रदान किया गया। 

सन् 1857 के गदर से आजमगढ़ अछूता न हीं रहा। कुवर सिंह आरा जिले के साहाबाद के शासक थे। अंग्रेजी हुकूमत ने उनका शासन सत्ता छीन लिया। उन्होंने अग्रंजी हुकूतमत के खिलाफ बगावत छेड़ दिया। जगह-जगह क्रातिकारियों को एकजुट करते हुये वह आजमगढ़ के लिये चले। इसके पहले ही यहां के क्रांतिकारियों ने कई प्रमुख अंग्रेज अधिकारियों को मौत के घाट उतारते हुये तीन जून 1857 को आजमगढ़ शहर सहित यहां के सभी कार्यालयों पर अपना कब्जा जमा लिया। आजमगढ़  में हर जगह स्वतंत्रता का झंडा लहराने लगा। सन् 1857 में करीब तीन महीने तक आजमगढ़ अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त रहा। इस दौरान कई लड़ाईयां भी हुइ। कप्तानगंज के पास भीलमपुर छपरा गांव पूरी तरह से क्रांति का अलख जगा चुका था। अंग्रेजी फौज ने पूरे गांव को घेर लिया। गांव के तमाम लोग तो अंग्रेजी हुकूमत के आगे नतमस्तक हो गये मगर चार राजपूत रणबाकुरों ने हरिनाम सिंह के नेतृत्व में मोर्चा संभाल लिया। गांव के बाग में लड़ाई शुरू हुई। अंग्रेजी फौज के कई सिपाहियों को मौत के घाट उतारते हुये ये चारो रणबांकुरे शहीद हो गये। गांव के इस बाग में प्रतिवर्ष शहीद मेला भी लगता है। आजमगढ़ पहुंचने के बाद कुंवर ंिसह ने क्रांतिकारियों की विशाल सेना को कई टुकडि़यों में बांट दिया। एक टुकड़ी अजमतगढ़ पहुंची। 

अजमतगढ़ में भूखे-प्यासे क्रांतिकारियों ने रईस भाईयों गोगा साव व भीखा साव से मदद मांगी। गोवा साव, भीखा सााव के खांड़सारी के सात कारखानों के साथ-साथ लम्बा चौड़ा व्यवसाय था। उन्होंने तत्काल कई कुंओं में कई बोरे चीनी डलवा दिये। सारे कुंओं का पानी ही शर्बत हो गया। सभी क्रांतिकाराी अपनी प्यास बुझाये। दोनों भाईयों ने क्रांतिकारियों की इस टुकड़ी को राशन व धन भी दिया। इसी क्षेत्र के छपरा सुल्तानपुर गांव के रहने वाले वंशी सेठ एवं कवल सिंह ने अंग्रेजों से इसकी मुखबिरी कर ली। अंग्रेजी फौज ने इनके घर को घेर लिया। यह दोनों भाइ तो पकड़ लिये गये मगर इनके विश्वसनीय मंुशी भैरो प्रसाद ने पूरे परिवार को किसी तरह से निकालकर भगा दिया। 16 सितम्बर 1858 को गोगा साव स भीखा साव को काला पानी की सजा दे दी गयी। आजमगढ़ की पौराणिक गाथा की काफी समृद्ध है। अत्रि मुनि एवं सती अनुसुईया के तीनों पुत्रोें ऋषि दुर्वासा, दत्तात्रेय एवं चन्द्रमा मुनि की तपोस्थलियां इसी जिले में है। तीनों भाईयों ने अपने पिता व मां की आज्ञा से इसी जिले के तमसा नदी के पावन तट पर यज्ञ किया। 

हयी नहीं महाराज परीक्षित की सर्प  दंश से हुई मृत्यु के बाद उनके पुत्र महाराजा जन्मेजय ने इसी जिले के अवन्तिकाुपरी मे सर्प यज्ञ किया। सर्पयज्ञ के लिये बनाया गया हवनकुण्ड आज भी विशाल सरोवर के रूप में मौजूद है। भगवान भोले शंकर के मना करने  के बावजूद उनकी पत्नी सती जब अपने पिता के धार्मिक आयोजन में भाग लेने पहुंची तो उपेक्षा होने पर हवन कुण्ड में कूदकर अपनी जान दे दी थी। वह स्थान आजमगढ़ में ही है। जिसे आज भैरोधाम के नाम से जाना जाता है। गुस्साये भोले शंकर जब सती का शव लेकर ब्राह्माण्ड का चक्कर काट रहे थे तो पैर का कुछ हिस्सा इस जिले के पल्हना में गिरा। उस स्थान को आज पवित्र पाल्हमेश्वरी धाम के नाम से जाना जाता है। 

साहित्यिक दृष्टि से आजमगढ़ हमेशा समृद्ध रहा है। यहां की माटी में जन्में महापंडित राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या प्रसाद उपाध्याय हरिऔध, कैफी आजमी, श्यामनारायण पाण्डेय गुरू भक्त सिंह भक्त, शैदा सरीखे लोग किसी परिचय के मोहताज नहीं है। 

अल्लामा शिब्ली नोमानी में तो देश भक्ति का अजीबोगरीब जज्बा था। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य थे मगर जब इस विश्वविद्यालय के मुस्लिम शब्द जोड़ा जाने लगा तो वह विरोध कर गये। उन्होंने इस विश्वविद्यालय से पूरी तरह से अपना नाता तोड़ लिया और आजमगढ़ आंकर नेशनल कालेज की आधार शिला रखे। उनकी मृत्यु के बाद यहां के लोगों ने इस कालेज में शिब्ली जोड़ दिया और कालेज का नाम शिब्ली नेशनल कालेज हो गया। यहां के लाइब्रेरी शिब्ली एकेडमी को आज एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी के रूप में जाना जाता है। यहां पर तमाम दुर्लभ पुस्तकें व पाण्डुलिपिंया है।

आज भी यहां होनहारों की कमी नहीं है। इस जिले के मनोज यादव ने क्रिकेट विश्वकप के लिये दे घुमा के गीत लिखकर एक बार फिर जहां विश्व में राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करके जिले को गौरवान्वित किया है।
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Sunday, February 11, 2018

Truth of interviews : Funny rejections 'You will be rejected'


If, you have knowledge more that interviewer :
You will be rejected.

If, interviewer has other reference over you :
You will be rejected.

If , you will try to confess about whats wrong and whats right:
You will be rejected.

If interviewer is boy and you also boy:
You will be rejected

if,interviewer is boy and there is another girl coming for interview:
You will be rejected.

If, you have good knowledge then asking for good salary:
You will be rejected.

If,Two person taking interview and any of them will not like your positive attitude. Doesn't matter even if 2nd one interviewer has positive feedback on you:
You will be rejected

If, the mood of interviewer is not good. If he/she has problem with life partners on same day :
You will be rejected.

If, your salary is more than the interviewer :
you will be rejected.

If, you have good knowledge in your field but if you forgot basics Like A B C D E F, Doesn't matter you have high level of knowledge:
you will be rejected.

If, you don't have knowledge in platform where company also not working right know :
you will be rejected.



WWW.SKYADAV.COM

Hit like & share if you like funny rejections.
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Thursday, February 1, 2018

Thoughts over today's Media and it's role, Well explained by Dushyant Ku...





Some Glimpses of my Azamgarh Visit #PleasedToSpeak #MyThoughtsOverTodaysMedia in front of Student , Advocates ,Media personal , requested them to raise there voice or Question against the corruption , raise questions to uplift the citizen's lifestyle , health , infrastructure of resources such as Hospitals , Schools in Azamgarh ,U.P. as well as all over India.
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Thursday, January 18, 2018

Ahopatti, Azamgarh is always going to be my hometown, I do love my hometown

AHOPATTI, AZAMGARH PIN 276001 , UP 50
No matter what happens to me and my career in the future, Azamgarh is always going to be my hometown . It's always a little different, racing on my hometown , Ahopatti tracks. It makes it more special. I do love my hometown. It really forged who I am in a major way.

(AHOPATTI, AZAMGARH PIN 276001 , UP 50)

I come from a small-Azamgarh hometown, Every Time I visit there I have some feelings hopefully these are same as yours. I hereby formulated them in Q&A form Just to make them countable: 

1. They’re still here?
Yes they are ... :)

2. Did they get married?
   Yes they got married at very little age too . :)

3. He/she has a child?!
   Y.Y.Y.....Yes ,,, N.N.N...No.. Some of them have their chld too, Some of them Parents in waiting.

4. This place isn’t so bad, after all
I couldn’t wait to get out of my hometown. I felt like nothing ever happened there and that there was no opportunity to go anywhere. But now, there are things I miss. The climate, for one–cool, fresh  air, as opposed to the heavy blanket of humidity that Azamgarh, Ahopatti wraps around its residents the moment they step out of the door.I miss the wide back roads with long slow curves that seem to invite you to drive on them. In short, once you leave and come back, in addition to noticing changes, it becomes possible to notice the good things that may have been taken for granted before.

5. OK, how am I going to split my time?
There’s never enough of it. I rarely get more than a week at a time to spend back home, which means that I end up getting stressed out trying to manage my time trying to see everyone I’ve missed and do everything I’ve been wanting to do. And even then, time passes so fast when spending time with people.

6. Why do I feel different?
    It's Obious ....Left for you to guess.

Hope you enjoyed the feelings ... :)

Happy Readings.... 

Please don't forget to mention your feelings about your Hometown in comment box....,,,

It will be absolute pleasure if you share this post in you circle.. :)


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Tuesday, December 26, 2017

महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिन के अवसर पर एक खास लेख


बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे, होता है शबो-रोज़ तमाशा मेरे आगे।  (Just like a child's playground this world appears to me Every single night and day, this spectacle I see )

मज़े जहां के अपनी  नज़र  में  ख़ाक  नहीं,  सिवा -ए -खून -ए -जिगर , सो  जिगर  में  ख़ाक  नहीं । (The happiness of the world is nothing for me for my heart is left with no feeling besides blood.)

'इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के'

दोस्तों ये शेर तो आपने भी कई बार बोला और सुना होगा. यह कुछ पंक्तियां हैं, जो हमारे जीवन में इस कदर शामिल हैं, जैसे यह हमारे जीवन का हिस्सा हों. आज हम आपको बताने जा रहे हैं करोड़ों दिलों के पसंदीदा शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के बारे में. दरअसल आज शेर-ओ-शायरी की दुनिया के बादशाह, उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर 'मिर्ज़ा ग़ालिब' का 220वां जन्मदिवस है. इस मौके पर मेरा एक खास लेख उनको समर्पित किया है. मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ ग़ालिब था. इस महान शायर का जन्म 27 दिसंबर 1796 में उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में एक सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था.

ग़ालिब के लिखे पत्र, जो उस समय प्रकाशित नहीं हुए थे, को भी उर्दू लेखन का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है. ग़ालिब को भारत और पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाना जाता है. उन्हे दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला का खिताब मिला है. ग़ालिब (और असद) नाम से लिखने वाले मिर्ज़ा मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे. आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में अपनी ज़िन्दगी गुजारने वाले ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों के लिए याद किया जाता है. उन्होने अपने बारे में स्वयं लिखा था कि दुनिया में यूं तो बहुत से अच्छे कवि-शायर हैं, लेकिन उनकी शैली सबसे निराली है-
'हैं और भी दुनिया में सुख़न्वर बहुत अच्छे कहते हैं कि ग़ालिब का है अन्दाज़-ए बयां और'

उनके दादा मिर्ज़ा क़ोबान बेग खान अहमद शाह के शासन काल में समरकंद से भारत आए थे. उन्होने दिल्ली, लाहौर व जयपुर में काम किया और अन्ततः आगरा में बस गए. ग़ालिब की प्रारम्भिक शिक्षा के बारे में स्पष्टतः कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन ग़ालिब के अनुसार उन्होने 11 वर्ष की अवस्था से ही उर्दू एवं फ़ारसी में गद्य तथा पद्य लिखने आरम्भ कर दिया था. इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको दिया जाता है.

कहते हैं 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह नवाब ईलाही बख्श की बेटी उमराव बेगम से हो गया था. वह विवाह के बाद से  दिल्ली आ गए थे जहाँ उनकी तमाम उम्र बीती. 15 फरवरी 1869 में महान प्रतिभा के धनी मिर्ज़ा ग़ालिब अंत समय में दिल्ली में रहते हुए हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा ले गए. लेकिन आज भी वह अपनी शेर ओ शायरी से लोगों के दिलों में जीवित हैं.

सोर्सेज  : गूगल इमेजेज , विकिपीडिया 
Link: https://en.wikipedia.org/wiki/Ghalib

                                                                      

                                                     - Santosh Kumar Yadav
                                                       27 Dec 2017
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Meri munich yatra part-1

Today I'm going to share my foreign trip that was for special event outside India . Everyone is being so excited to be in Europe out of this if someone is Got to visit  Germany that will be cherry on the cake for him . Germany is beautiful place to visit.Like  other  I have a list of dream destination of mine , Munich is one out of list .

I will tell you in detail about my first foreign trip to one of my dream destination Munich having in mind  what the culture and what the transportation system ,culture society , individual , professionalism environment , education system, habits of  any individual of Asian country like India since i am an Indian.


Let's talk about how the trip is getting started. We at G&D just finished with an event Hackathon having theme 'A smart city' at pune development centre. One  day I got the mail that there will be another event Hackathon with theme "Returns of Hackers". where people from various geographical area will come together and try to disrupt  Giesecke & Devrient  already existing products.  As I said in this event people will participate from various geographical  geographical area that means this evening is going to be a global event .  Like always I was so excited to participate in this event ,In  the same mail in which information of  this global event given , has also special link to ensure  individual's participation from various centre of  G&D. 

In short I can tell you that the link (I can not disclose here) which I am discussing here was the link for a portal from where we can fetch more information about the event and it's categories and the date of event and the place of the event and the rules of the event  organisers name of the event, detail of  judges of the event  Judging criteria everything wasn't  given on that  portal. 

In process of participation there was an important initial step that you must have approval from here your HOD , At the local level ................ Continue...

Thanks for reading , Happy Reading ... :)

To know what next please stay tuned for next part of Meri munich yatra.
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Sunday, February 19, 2017

Handling Critics




In your day to day life you face numerous people. Few people love you and few may hate you. Someone hates you knowing this fact and you feel bad, but you can improve yourself by inputs of person. Firstly let us know the meaning of Critics and Criticism, Then how to deal with these.

Critics:
·         A person who expresses an unfavorable opinion of something.
·         A person who judges the merits of literary or artistic works, especially one who does so professionally.
Synonyms:
Censurer, Detractor, attacker, fault-finder, carper, backbiter, reviler, traducer, disparager, belittler, more informal knocker, nitpicker;
             
Criticism:
·         The expression of disapproval of someone or something on the basis of perceived faults or mistakes.
·         The analysis and judgment of the merits and faults of a literary or artistic work.
Synonyms: Evaluation, assessment, examination, appreciation, appraisal, analysis, judgment.

Criticism is the act of analyzing or evaluating based on propriety and knowledge. Unfortunately, criticism is often delivered when someone perceives that we have failed them, not meeting their expectations. Then we face words spoken out of disappointment, frustration, envy, anger. And we start responding in the same manner-with sarcasm, anger, defensiveness.  A healthy, respectful relationship is not possible, when two people communicate with each other in this fashion. Since, it is important to understand how to deal with criticism within our relationships-whether they are casual, intimate, work related.

Criticism can be Constructive and Destructive:

Destructive criticism, This kind of criticism can hurt your pride and have negative effects on your confidence and self-esteem.  This is just because of thoughtlessness by other person, but it can also be deliberately hurtful and malicious.  This can lead to anger and/or aggression.

Constructive criticism, Unlike Destructive criticism, this will point out your mistakes, but also showing you how and where improvements can be made. This should be viewed as useful feedback that can help you improve yourself rather than put you down.
When criticism is constructive it is usually easier to accept, even if it still hurts a little.  Always try to remember that you can use this criticism to your advantage.




How to deal with Critics & Criticism:

·         React politely and friendly. Never let your temper get the better of you. Don't feed the troll.
·         Keep up the good work. It's easy to hate the haters. The high road is what separates the adults from the trolls.

·         Listen carefully, what a critic is saying

·         Don’t expose yourself to criticism from people you don’t respect.

·         Admit your mistakes.

·         Sometimes enjoy fun of failure.

·         You can ask open-ended questions

·         Stop feeling mistakes as entirely bad because A man who refuses to admit his mistakes can never be successful.

·         Starts taking the Positives out of Criticism

·         Always try to be Calm

·         Keep in mind the Value of the Critics and the Source.

·         You Might Be Wrong Acknowledging it.

·         Try to respond with Grace. 

“We all learn by making mistakes and learning how to deal with criticism positively is one way that we can improve our interpersonal relationships with others”.

“Apply adult Mindset against criticism try to figure out Constructive and destructive criticism. Appreciate the Constructive, ignore the destructive”

                                             Happy reading…. J
                         
All rights reserve Feb-2017 @ Santosh Kumar Yadav                


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